गुवाहाटी, 26 नवंबर 2025। Guwahati Test: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू मैदान पर 2-0 से मिली करारी हार के बाद उन्होंने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में हार की पूरी जिम्मेदारी खुद पर ले ली। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट में भारत को 408 रनों से करारी शिकस्त मिली, जो टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी हार है। इस हार ने सीरीज को 0-2 से सफेद धुलाई दे दी।
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गंभीर ने साफ कहा कि कोचिंग भविष्य का फैसला BCCI लेगी, लेकिन उन्होंने अपनी पिछली उपलब्धियों का भी जिक्र किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने कहा, “हार की जिम्मेदारी सबसे पहले मेरी है। मैं कभी किसी खिलाड़ी को दोष नहीं देता। दोष सबका है।” उन्होंने बताया कि पहले टेस्ट कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हार के बाद गुवाहाटी में टीम 95/1 से 122/7 तक ढह गई, जो अस्वीकार्य है। “ऐसी गिरावट स्वीकार नहीं की जा सकती। लेकिन इसे किसी एक शॉट या खिलाड़ी की गलती से जोड़ना सही नहीं। पूरी टीम को सीखना होगा।”
गंभीर ने जोर देकर कहा कि जिम्मेदारी साझा होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत। जब पत्रकारों ने उनके कोचिंग करियर के भविष्य पर सवाल उठाया, तो गंभीर ने कहा, “मेरा भविष्य BCCI तय करेगी। लेकिन याद रखिए, मैं वही व्यक्ति हूं जिसने इंग्लैंड दौरे पर 2-2 से ड्रॉ कराया और चैंपियंस ट्रॉफी जितवाई। एशिया कप भी मेरे नेतृत्व में जीता गया।” उनके कार्यकाल में भारत ने 18 टेस्ट खेले, जिनमें 10 हार मिलीं। इसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सफेद धुलाई भी शामिल है।
आलोचकों ने उनकी टीम चयन नीति पर सवाल उठाए, खासकर ऑलराउंडर्स को प्राथमिकता देने पर। गंभीर ने बचाव किया, “टेस्ट क्रिकेट के लिए सबसे चमकदार खिलाड़ियों की जरूरत नहीं। धैर्य और मानसिक मजबूती चाहिए। ”फैंस और पूर्व खिलाड़ियों में गुस्सा भरा है। सोशल मीडिया पर #SackGautamGambhir ट्रेंड कर रहा है। पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों ने रणनीति पर सवाल उठाए। गंभीर ने कहा कि टीम में अनुभव की कमी है, लेकिन युवा खिलाड़ी सीख रहे हैं।
मैं ड्रेसिंग रूम के प्रति पूरी जिम्मेदारी महसूस करता हूं। जवाबदेही सिखाई नहीं जा सकती, यह देखभाल से आती है। ”BCCI ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन यह हार टेस्ट क्रिकेट में भारत की गिरती रैंकिंग को उजागर करती है। गंभीर का कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन सफलताएं भी हैं। अब सवाल यह है कि क्या BCCI उन्हें मौका देगी या बदलाव लाएगी? कुल मिलाकर, गंभीर की ईमानदारी सराहनीय है, लेकिन परिणामों पर सुधार जरूरी।
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